Thursday, January 03, 2019

सब कुछ धुंधला हैं क्यों


आईने के सामने जो मैं खड़ा हूँ 
सब कुछ धुंधला हैं क्यों  

दिल की तमन्नाए थी 
लेकिन दिल को हमने समझाया था भी 

जो पल ढल गए उनकी यादों में 
मन को मचलने न दिया हमने 

सीने में जो जलन थी 
हमने आग तो बुझाई भी 

सपनों के जो दीप जले थे 
उनकी लौ को सुलझाया भी है 

वो न समझी हमें जब 
तन्हाई को मंज़िल बनाई तब 

आँखों में तूफ़ान हैं 
पर नमी तो नहीं आने दी हैं 

मैं आइना देख के हैरान हूँ 
सब कुछ धुंधला धुंधला क्यों हैं  

चश्मा जो निकाला  परेशानी में 
सब कुछ साफ़ हो गया एक घडी में 


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